मकर नक्षत्र कुंभ नक्षत्र मीन नक्षत्र
मकर नक्षत्र
उत्तरषाढा :
इस नक्षत्र के देव विश्व नाम के १३ देव और स्वामी सूर्य है | इस राशि के सारे गुण इस नक्षत्र के जातको में पाए जाते हैं | उत्साह ज्यादा और स्वार्थ कम पाया जाता है | ये बहुत शीघ्र तरक्की करना चाहते हैं | इनमें स्वार्थ के साथ साथ परमार्थ की भावना भी पायी जाती है | भविष्य को ध्यानमें रखकर वर्तमान में थोड़ा-थोड़ा जमा करते हैं | अपनी पसंद का साथी चुनते हैं |
श्रवण :
इस नक्षत्र के देव विष्णु और स्वामी चंद्र है | इस नक्षत्र और इस राशि मे जन्मे जातकों मे इस राशि के दुर्गुण पाए जाते हैं | आकर्षक नैन- नक्श का चेहरा होता है | ये शांतिप्रिय, धार्मिक और सिद्धान्तवादी होते हैं |इन्जिनियरिंग और टेक्नोलाजी के क्षेत्र में काम करने में माहिर होते हैं | कौटुंबिक जीवन सीधा और सरल होता है |
धनिष्ठा :
इस नक्षत्र के देव वासव और स्वामी मंगल है | ये जातक अति उत्साही होते है और इस वजहसे कोई भी कार्य करने के लिये हमेशा तत्पर रहते है | इनमें स्वार्थवृत्ति कम पयी जाती है | इनमें शारीरिक सुख पाने जैसे जुनुन होता है |
कुंभ नक्षत्र
धनिष्ठा :
इस नक्षत्र के देव वासव और स्वामी मंगल है | ये उत्साही, मेहनती और उदार होते हैं | खुद का स्वार्थ नही देखते हैं | अभिमानी नही होते है | कुंभ राशि के सभी गुण इनमें पाए जाते हैं | शारीरिक शक्ति बहुत होती है |धूर्तता नही होती है |
शतभिषा:
इस नक्षत्र के देव वरुण और स्वामी राहु है | कार्य करवाने का गुण इनमें पाया जाता है | उत्साही होते हैं | दुसरों पर प्रभाव डालने की प्रवृत्ति इनमें ज्यादा पायी जाती है | हिम्मतवाले और साहसिक होते है |अभिमानी नही होते हैं | तत्वज्ञानी तो होते है पर पूर्वषाढा नक्षत्र के जातकों से कम |
पूर्वषाढा :
इस नक्षत्र के देव जल और स्वामी शुक्र है | इस नक्षत्र के जातक बहुत अभिमानी होते हैं | ये प्रभावशाली होते है और सामाजिक प्रतिष्ठा पाने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते हैं | शतभिषा नक्षत्र के जातकों से ये ज्यादा तत्वज्ञानी होते हैं |
मीन नक्षत्र
पूर्वाभाद्रपद :
इस नक्षत्र के देव अजयकपत और स्वामी गुरु है | इन जातकों में स्वार्थ परकता अधिक होती हैं |इनमें बौद्धिक विकास कम होता है | अपनी पत्नी या पति को ससुर पक्ष को लेकर टोकते रहते हैं | लेकिन उत्साह के मामले मे ये सबको पीछे छोड सकते हैं |
उत्तर भाद्रपद :
इस नक्षत्र के देव आहिर बुधन्या है और स्वामी शनि है | ये स्थिरचित्त और औसत स्वार्थपरक होते है | बौद्धिक विकास अच्छा होता है | इऩ्हे सफ़लता प्राप्त होती है | हर विषय कि गहराई में उतरना पसंद करते हैं | धर्म और दर्शन का ज्ञान प्राप्त करने की कोशिश करते हैं | प्रत्येक कार्य मे संतुलन बनाए रखते हैं | लगनशील होते हैं और दुसरों की मदद करना पसंद करते हैं |
रेवती : ( गंड मूल दोष )
इस नक्षत्र के देव पुश्वव और स्वामी बुध है | इन जातको में स्वार्थ और भय कि भावना ज्यादा पायी जाती है | इस नक्षत्र में इस राशि के जितने ज्यादा अंश होंगे राशि के गुण उतने ज्यादा पाये जायेंगे | बढ़ती उम्र के साथ ये कमजोर होते जाते हैं | इनमें संचय करने की मनोवृत्ति पायी जाती है |
रेवती नक्षत्र:
१ चरण : राज्य एवं सम्मान ।
२ चरण : वैभव में वृद्धि ।
३ चरण : व्यापार में लाभ ।
४ चरण ; विविध प्रकार के कष्ट ।
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