सूर्य का शुक्र की राशि वृष राशि में गोचर करना जहां कुछ लोगों को लाभ देगा तो वहीं दूसरी ओर कुछ जातकों के जीवन में समस्यायें भी उत्पन्न करेगा।
सूर्य और शुक्र आपस में शत्रुता का भाव रखते है।
आइये जानते है कि सूर्य का यह राशि परिवर्तन किस राशि के लिए कैसा रहेगा ?
सूर्य के वृष राशि में गोचर करने पर विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा-
मेष- दूसरे भाव में सूर्य के गोचर करने से यह समय आपके लिए साधारण ही कहा जा सकता है। समस्या ग्रस्त लोगों को राहत के आसार नजर आयेंगे। नयें व्यापार में अनेक प्रकार की अड़चनों का सामना करना पड़ेगा। कुछ घरेलू नयीं समस्यायें भी उत्पन्न हो सकती है। कुछ लोग लग्जीरयस चीजें को भी खरीद्दारी करेंगे।
वृष- पहले भाव में सूर्य के रहने से आपका समय अनुकूल नजर आ रहा है। कार्य व व्यापार में वृद्धि होगी जिससे आमदनी बढ़ेगी। परिवार में शुभ कार्य होने के आसार नजर आ रहे है। कुछ लोगों को सिर दर्द की शिकायत हो सकती है। वाणी पर नियन्त्रण बनायें रखें।
मिथुन- आपके 12वें भाव में सूर्य के गोचर करने से कार्य क्षेत्र में प्रगति होगी। नयें लोगों से मित्रता बढ़ेगी। लम्बित कार्य पूर्ण होंगे जिससे नई आशा का संचार होगा। धन-धान्य में वृद्धि होगी लेकिन खर्चे में भी वृद्धि होगी। कुछ लोगों को नींद न आने की समस्या बनी रह सकती है।
कर्क- आपके 11वें भाव में सूर्य का गोचर करना शुभ फलदायक साबित होगा। मित्रों के साथ मनोरंजन करने का अवसर प्राप्त होगा। नौकरी पेशा वाले लोगों के लिए अच्छा रहेगा। घर-गृहस्थी में चली आ रही दिक्कतों का समाधान होगा। पूर्व में किये गये निवेश से लाभ प्राप्त होगा। रोजगार में वृद्धि होगी।
सिंह -इस राशि वालो के लिए वृष का सूर्य लाभकारी साबित होगा। पद, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। कार्यो में आ रही अड़चने दूर होगी। कुछ कार्य ऐसे होंगे जिससे मन में प्रसन्नता आयेगी। शनि की ढैय्या के कारण आप दो कदम आगे बढ़कर फिर दो कदम पीछे लौटगें। आपको लगेगा कि सबकुछ बड़ी आसानी से हो रहा है लेकिन ऐन वक्त पर कोई अड़चन आ जायेगी।
कन्या- वृष का सूर्य आपके भाग्य भाव में गोचर करेगा। धर्म-कर्म में रूचि बढ़ेगी और भाग्य पक्ष में मजबूती आयेगी। जो लोग विदेश यात्रा के लिए अप्लाई किये है, उन्हे सफलता मिलने के आसार है। स्वास्थ्य सम्बन्धी कुछ दिक्कतें आ सकती है। बहुत लोग इस समय विवाह बन्धन में बधेंगे।
तुला-आपके आठवें भाव में वृष का सूर्य गोचर करेगा। योजानयें बनाते समय गोपनीयता बनायें रखनी होगी अन्यथा आपके किये कराये पर सब पानी फिर सकता है। प्रेमी वर्ग को इस समय विशेष सावधानी बरतनी होगी वरना गुप्त सम्बन्ध उजागर हो सकते है। शेयर से जुड़े लोग निवेश में सावधानी बरतें।
वृश्चिक-इस समय आपके सातवें भाव में सूर्य गोचर करेगा। सप्तम का सूर्य आपके वैवाहिक सम्बन्धों में तनाव उत्पन्न कर सकता है। कुछ लोगो को अचानक स्थान परिवर्तन भी करना पड़ सकता है। राशि पर शनि का प्रभाव रहने से आप में कुछ चिड़चिड़ापन आ सकता है। वाहन प्रयोग में सावधानी बरतें वरना चोट-चपेट लग सकती है।
धनु- इस राशि वालों के लिए छठें भाव का सूर्य जॉब में आ रही दिक्कतें को दूर करेगा। नयें लोगों को जाॅब मिलने के भी आसार है। रूके हुये कार्यो में प्रगति होगी। इन दिनों अधिक श्रम करने पर कम लाभ प्राप्त होगा। परिवार की बीमारियों पर अधिक खर्च हो सकता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए सन्तुलित और पौष्टिक भोजन करना होगा।
मकर -आपके पंचम भाव में सूर्य का गोचर करना सामान्य फलकारक रहेगा। कर्ज लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। धन के लेन-देन में सावधानी बरतना अपेक्षित है। सम्बन्धों में उदासीनता से बचना होगा। गैर सरकारी संस्थाओं से जुड़े लोगों को कुछ अच्छे अवसर प्राप्त हो सकते है। छात्रों के लिए यह समय थोड़ा संघर्षशील रह सकता है।
कुम्भ- आपकी राशि में चैथे भाव में सूर्य का गोचर करना सामान्य फलकारक रहेगा। कुछ लोगों को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना होगा। बल्ड प्रेशर व शुगर रोगियों को इस समय सचेत रहना होगा। वाहन या मकान की मरम्मत पर धन का अपव्य हो सकता है। जो लोग साझे में काम करते है, उनके सम्बन्धों में दरार पड़ सकती है।
मीन- आपके तीसरे भाव में सूर्य के गोचर करने से अच्छे फल मिलेंगे। बहुत दिनों से रूके हुये काम पूरे होगें। रोजगार व नौकरी में प्रगति होगी। नयें सम्बन्धों से भी लाभ होगा। किये गये वादे पूरे करने पर आप प्रशंसा के पात्र बनेंगे। इस समय जिन लोगों का साक्षात्कार होगा, उन्हे शतप्रतिशत सफलता मिलने के आसार है।
सोमवार, 18 अप्रैल 2016
सूर्य के वृष राशि में गोचर
रविवार, 17 अप्रैल 2016
सिंह गुरू का प्रभाव जानिए! आपकी राशि को किस तरह प्रभावित करेगा
जानिए! आपकी राशि को किस तरह प्रभावित करेगा सिंह गुरू का प्रभाव ?
14-07-2015 को 06:25:25 बजे से प्रतापी एवं उदार ग्रह गुरू अपना पारगमन सूर्य की स्वामित्व वाली राशि सिंह के बीच से करने जा रहा है। गोचर का गुरू अपनी उच्च की राशि को छोड़ेगा अर्थात कर्क को छोड़कर सिंह में प्रवेश करेगा एवं 12-08-2016 तक निरंतर इस राशि में पारगमन करेगा।
वैदिक ज्योतिष के अनुसार सिंह के बीच से गुरू के पारगमन को सिंह गुरू के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार सिंह गुरू को किसी भी संदिग्ध गतिविधि या धार्मिक समारोह के लिए अशुभ माना जाता है। यह प्रभाव आपको 14.07.2015 से 12.08.2016 तक देखने को मिलेगा। यह महत्वपूर्ण ग्रहीय गतिविधि किस तरह व्यक्तिगत स्तर पर आपको प्रभावित कर सकती है के बारे में गणेशजी हम को आगे बताने जा रहे हैं। गणेशजी ने इस ग्रहीय गतिविधि का प्रभाव अलग अलग राशियों पर देखने का प्रयास किया है।
सिंह गुरू का आपकी राशि पर प्रभाव
मेष
गणेशजी बता रहे हैं कि गुरू पारगमन मेष जातकों के लिए काफी अनुकूल है, विशेषकर शैक्षणिक महत्वाकांक्षाओं और योजनाओं हेतु। इस समय गुरू आपके शिक्षा से संबंधित घर के बीच से पारगमन कर रहा है, इसलिए आप शैक्षणिक क्षेत्र में अच्छे नतीजों की उम्मीद कर सकते हैं। छात्रों के लिए यह समय काफी उत्तम साबित हो सकता है। हालांकि, 10 जनवरी 2016 से उन सभी जातकों को अत्यंत सावधान रहने की जरूरत है, जो शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हैं या पढ़ रहे हैं क्योंकि आपके शिक्षा संबंधित घर में गुरू के साथ राहु युति बनाएगा। गणेशजी बता रहे हैं कि राहु पारगमन काफी प्रतिकूल साबित हो सकता है, यदि आप ने उपरोक्त अवधि दौरान सावधानी न बरती। इस समय आपकी प्रगति की चाल प्रभावित हो सकती है एवं ध्यान इधर उधर भटक सकता है। जो जातक संतान प्राप्ति के लिए प्रयत्नरत हैं, उनको गणेशजी गुरू पारगमन के दौरान इस मामले में सक्रिय प्रयास करने के लिए हर झंडी दे रहे हैं। हालांकि, महिला जातकों को इस समय दौरान रूटीन चेकअप के लिए जाना चाहिए, यदि उनका उपचार या चिकित्सकीय परामर्श चल रहा है।
वृषभ
गुरू आपकी राशि से चौथे भाव पर से पारगमन करेगा, यह भाव सुख सुविधा से जुड़ा हुआ है। जो जातक मास्टर डिग्री कर रहे हैं, उनके लिए समय अच्छा है एवं इम्तिहानों में अच्छा प्रदर्शन करेंगे। हालांकि, यदि आप कर सकते हैं, तो आपको अपना फाइनल प्रोजेक्ट जुलाई 2015 और जनवरी 2016 के बीच सुपुर्द करना चाहिए, क्योंकि आप राहु के नकारात्मक प्रभाव से बचने में सफल हो सकते हैं। इसके अलावा, इस समय वृषभ जातकों को नया वाहन या घर खरीदने का सुनहरा अवसर मिल सकता है। आप इस ग्रहीय स्थिति का लाभ ले सकते हैं। इसके अलावा, जो जातक रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े हुए हैं या प्रोपर्टी संबंधित कार्य करते हैं, उनको 10/01/2016 से 09/05/2016 तक विशेष तौर पर सावधान रहने की जरूरत है।
मिथुन
गुरू आपकी राशि के तीसरे भाव से पारगमन करेगा। गुरू का सिंह के बीच से पारगमन आपकी राशि के लिए सामान्य रहेगा, हालांकि, हो सकता है कि गुरू ने आपको कर्क में रहते हुए काफी सुखद पलों का अनुभव करवाया हो। इस समय आपके जीवन में कुछ कम समय के सुखद आयोजन हो सकते हैं। कुल मिलाकर आपको इस समय के दौरान मिले जुले नतीजे मिलेंगे। कुछ कुछ मौकों पर नकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं। फिलहाल, इस पारगमन के दौरान आपके लिए प्रवास काफी अनुकूल रहेगा। गणेशजी महसूस कर रहे हैं कि इस समय आपको अधिक प्रवास करने के अवसर मिल सकते हैं, जो आपको व्यस्त रख सकते हैं।
कर्क
14 जुलाई 2015 के बाद से गुरू आपकी राशि को छोड़कर सिंह में प्रवेश करेगा, जो आपकी राशि से दूसरा घर है एवं यह परिवार एवं संपत्ति से जुड़ा हुआ है। इसलिए गुरू का यह पारगमन कर्क जातकों के लिए काफी फायदेमंद साबित होने जा रहा है, विशेषकर जनवरी 2016 तक, क्योंकि बाद में राहु गुरू के साथ युति में होगा। आप अच्छे वित्तीय लाभों क उम्मीद कर सकते हैं एव परिवार की खुशी के लिए धन खर्च करेंगे। गणेशजी की सलाह है कि 31 जनवरी 2016 के बाद से आपको काफी सतर्क रहने की जरूरत है। आपको अपनी बोल चाल पर विशेष ध्यान रखना होगा, अन्यथा आपके व्यवहार के कारण किसी को मानसिक तौर पर पीड़ा पहुंच सकती है। सावधान रहें, क्योंकि इस समय दौरान आप कुछ गलत लोगों की संगत में आ सकते हैं। वित्तीय मामलों में भ्रम की संभावनाएं बहुत अधिक हैं।
सिंह
गुरू आपकी राशि के बीच से पारगमन रहा है, जो स्वाभाविक तौर पर आपके लिए एक अच्छी ख़बर है। इसके अलावा गुरू आपके शिक्षा, विवाह एवं भाग्य से संबंधित भाव पर नजर डाल रहा है। गणेशजी महसूस कर रहे हैं कि विवाह योग्य जातकों की विवाह संबंधी बात आगे बढ़ेगी या शहनार्इ बज सकती है। सिंह महिला जातक इस पारगमन दौरान गर्भधारण कर सकती हैं या इस मामले में इच्छुक महिला जातकों को सकारात्मक नतीजे मिल सकते हैं। गणेशजी की सलाह है कि सकारात्मक प्रभाव को बढ़ाने के लिए आपको अभी से शिवलिंग पंचामृत अभिषेक करना शुरू कर देना चाहिए। शिवलिंग की पूजा आराधना करने से आपको निकट भविष्य में ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव से बचने मदद मिलेगी क्योंकि 31 जनवरी 2016 के बाद से नकारात्मक ग्रह राहु गुरू के साथ युति में होगा, जो आपके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। हालांकि, उससे पहले का समय आपके लिए काफी अनुकूल है एवं उसका भरपूर फायदा उठाएं।
कन्या
गुरू आपकी राशि से बारहवें स्थान में पारगमन करेगा, जो नुकसान, विदेशी मामलों, धार्मिक उद्देश्य के लिए होने वाले खर्च से जुड़ा हुआ है। गणेशजी कह रहे हैं कि जो कन्या जातका विदेश जाने के इच्छुक हैं, उनको जनवरी 2016 से पहले प्रयास करने चाहिए, क्योंकि इस समय सफलता मिलने की संभावनाएं प्रबल हैं। इसके अलावा इस समय आप किसी धार्मिक स्थल की यात्रा या घर पर धार्मिक समारोह आयोजित करने संबंधी विचार सकते हैं। जो जातक नौकरी या अपने करियर क्षेत्र को बदलना चाहते हैं, उनको इस समय का लाभ लेने के लिए तैयार रहना चाहिए। इसके अलावा जातकों को किसी अन्य स्थल पर जाने के लिए भी तैयार रहना होगा। हालांकि, बहुत सारी बातें आपकी जन्म कुंडली की ग्रह स्थितियों पर निर्भर करेगी,क्योंकि हर जन्म कुंडली अलग होती है।
तुला
गुरू अपना राशि परिवर्तन करते हुए सिंह में प्रवेश कर रहा है, जो आपकी राशि से ग्यारहवां घर है। यह घर लाभ, आशापूर्ति, मैत्री, सुरक्षा, बीमारी या मुसीबत से वापसी इत्यादि से जुड़ा हुआ है। तुला जातकों को खुश होना चाहिए क्योंकि गुरू का सकारात्मक पारगमन उनके जीवन में प्रसन्नता, स्मृद्धि एवं उल्लास लेकर आएगा। आप शैक्षणिक एवं वित्तीय मामलों में सकारात्मक प्रदर्शन की उम्मीद कर सकते हैं। जो जातक अपनी पढ़ार्इ के आगे बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए समय अनुकूल है। इसके अलावा गणेशजी महसूस कर रहे हैं कि गुरू सन्तति / बच्चे / रचनात्मकता के घर से जुड़े हुए भाव पर दृष्टि डाल रहा है। यदि आप प्रजनन मामले में समस्या से जूझ रहे हैं, तो इस समय आपकी समस्या खत्म हो सकती है। हालांकि, राहु एवं गुरू की युति से पहले पहले आपको गुरू की कृपा का लाभ उठाना होगा, जो जनवरी 2016 तक आप पर बनी रहेगी।
वृश्चिक
गुरू आपकी राशि के दसवें घर से पारगमन कर रहा है, जो घर भाग्य एवं पेशे से जुड़ा हुआ है। गणेशजी महसूस कर रहे हैं कि इस समय आपको पेशेवर जीवन में काफी अच्छे अवसर मिल सकते हैं। वृश्चिक जातक इस समय पेशेवर जीवन में कुछ नया करने पर विचार कर सकते हैं। यह पारगमन आपके करियर संबंधी दृष्टिकोण को पूर्ण से बदलने वाला साबित हो सकता है एवं आप पेशेवर जीवन में इस समय उल्लेखनीय प्रगति कर सकते हैं। जो व्यवसायी जातक हैं, वो इस समय अपने उत्पादों की संख्या में वृद्धि कर सकते हैं। हालांकि, वृश्चिक जातकों को शनि पारगमन के कारण कुछ स्वस्थ्य संबंधित समस्याएं आ सकती हैं।
धनु
गुरू आपकी राशि से नौवें स्थान में पारगमन करेगा, जो घर भाग्य से जुड़ा हुआ है। गणेशजी बता रहे हैं कि यह पारगमन धनु जातकों के लिए काफी अच्छा साबित होने वाला है। गुरू आपकी राशि का स्वामी है। इसलिए आप उम्मीद कर सकते हैं कि आपको इस समय काफी नए अवसर मिल सकते हैं। इस समय धनु जातकों को प्रवास करने के काफी मौके मिलेंगे एवं उनको प्रवास में मजा भी आएगा। गणेशजी महसूस कर रहे हैं कि आप किसी धार्मिक स्थल की यात्रा पर जा सकते हैं। हालांकि, आपको जनवरी 2016 के बाद काफी ध्यान रखने की जरूरत रहेगी, क्योंकि राहु आपकी राशि के स्वामी गुरू के साथ सिंह राशि में युति बनाएगा।
मकर
गुरू आपकी राशि से आठवें स्थान में पारगमन करेगा। यह घर अवरोधों के साथ जुड़ा हुआ है। इस समय आपके खर्चों में वृद्धि हो सकती है। गणेशजी आपको सलाह देते हैं कि इस समय नए प्रोजेक्टों को शुरू या किसी जगह बड़ा निवेश करने से बचें क्योंकि इस समय आपके धन के फंसने की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। इस समय किसी से उधार धन लेने से बचें क्योंकि आपको उधार लौटाने में काफी मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। कुल मिलाकर कहें तो मकर जातकों के लिए गुरू पारगमन अधिक अनुकूल नहीं है। आपको गुरू की सकारात्मक शक्ति की प्राप्ति हेतु दत्ता भवानी का जाप करना चाहिए। इसके अलावा आप अपने धर्म गुरू की उपासना भी कर सकते हैं। गणेशजी की सलाह है कि आपको पुखराज रत्न धारण करना चाहिए एवं यह लगभग चार कैरेट से बड़ा होना चाहिए तथा सोने में धारण करें। इससे आपके जीवन में प्रसन्नता एवं स्मृद्धि दोनों आएंगी।
कुंभ
गणेशजी देख रहे हैं कि गुरू आपकी राशि से सातवें घर में पारगमन करने जा रहा है। यह घर हिस्सेदारी, विवाह एवं संबंधों से जुड़ा हुआ है। शादी के इच्छुक अविवाहित जातकों को मुस्कराना चाहिए, क्योंकि उनके लिए यह समय काफी अनुकूल है। यदि किसी जातक की विवाह संबंधी बात अटकी हुर्इ है, तो इस समय सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल सकती है। कुंभ पुरुष अविवाहित जातकों को अरका विवाह पूजन विधि संपन्न करनी चाहिए, यदि उनके विवाह संबंधित मामलों में निरंतर अवरोध आ रहे हैं। जबकि महिला जातक कुंभी विवाह विधि करवा सकती हैं। गणेशजी विश्वास दिलाते हैं कि इससे विवाह की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। कुल मिलाकर विवाह संबंधित मामलों के लिए गुरू पारगमन काफी अच्छा है। इसलिए आपको इसका फायदा लेना चाहिए।
मीन
आपकी राशि का स्वामी गुरू आपकी राशि से छठे घर में पारगमन कर रहा है। यह घर स्वास्थ्य एवं बीमारी से जुड़ा हुआ है। इस समय आपको अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत रहेगी। गणेशजी सलाह देते हैं कि जो जातक मधुमेह या रक्तचाप जैसी समस्या से पीड़ित हैं, उनको निरंतर अपना चेकअप करवाते रहना चाहिए। यदि आप ने अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया तो इस समय वजन, शूगर एवं चर्बी का स्तर काफी बढ़ सकता है। जो जातक अपनी नौकरी बदलना चाहते हैं, उनको जनवरी 2016 से पहले निर्णय लेना चाहिए, क्योंकि उसके पश्चात का समय इतना अनुकूल नहीं होगा, विशेषकर इस संबंध में निर्णय लेने हेतु।
होली पर वशीकरण के दिलचस्प उपाय
होली पर वशीकरण के दिलचस्प उपाय
* शुक्ल पक्ष के रविवार को 5 लौंग शरीर में ऐसे स्थान पर रखें, जहां पसीना आता हो व इसे सुखाकर चूर्ण बनाकर दूध, चाय में डालकर जिस किसी को पिला दी जाए तो वह वश में हो जाता है।
* वैजयंती माला धारण करने से शत्रु भी मित्रवत व्यवहार करने लगते हैं। ऐसी मान्यता है, भगवान श्रीकृष्ण यह माला पहनी हुए हैं व उनमें सबको मोहित करने की अद्भुत क्षमता है।
* कई बार पति किसी दूसरी स्त्री के प्रेमजाल में आ जाता है तो अपनी गृहस्थी बचाने के लिए स्त्रियां यह प्रयोग कर सकती हैं। गुरुवार रात 12 बजे पति के थोड़े से बाल काटकर जला दें व बाद में पैर से मसल दें, अवश्य ही पति सुधर जाएगा।
रविवार, 10 अप्रैल 2016
गुरु चांडाल योग, क्या है निवारण
जानिए किसे कहते हैं गुरु चांडाल योग, क्या है निवारण
मेष राशि या लग्न वालों के लिए गुरु नवम व द्वादश भाव का स्वामी होकर पंचम भाव से चांडाल योग बनाने से धर्म में अरुचि, विवेक का ह्रास, संतान को कष्ट, बाहरी संबंधों में बिगाड़ की संभावना को बढ़ा देता है। ऐसी स्थिति यदि जन्म लग्न में हो तो अत्यंत प्रभावी होगा अत: भारी नुकसान का सामना करना पड़ेगा।
उपाय : दत्त भगवान के मंदिर में प्रति गुरुवार पांच केले चढ़ाएं व हल्दी या केसर का तिलक लगाएं। पुखराज पहनें।
वृषभ राशि व लग्न वालों को गुरु का चांडाल योग
चतुर्थ भाव से बन रहा है। अतः पारिवारिक समस्याओं से जुझना पड़ेगा। सुख में कमी महसूस होगी।
उपाय : नाभी में केसर का घोल लगाएं व कन्याओं को पांच केले दें एवं स्त्री का सम्मान करें। मांस-मदिरा का सेवन ना करें।
मिथुन राशि व लग्न वालों को गुरु-राहु का
चांडाल योग तृतीय भाव से बन रहा है। पराक्रम में कमी अनावश्यक शत्रुओं से परेशानी का कारण बन सकती है। छोटे भाइयों को तकलीफ हो सकती है। पत्नी, दैनिक व्यवसाय व राजनीति से जुड़े व्यक्तियों के लिए भी चिंता का विषय है।
उपाय : केसर साथ में रखें। स्त्रियों का अपमान ना करें, वहीं छोटे भाइयों को मदद करें।
कर्क राशि व लग्न वालों के लिए द्वितीय धन भाव से चांडाल योग बन रहा है। ऐसे जातकों को धन से संबंधित परेशानी, वाणी दोष, कुटुम्ब के व्यक्तियों से क्षति का सामना करना पड़ सकता है। शत्रु से परेशानी, भाग्य में बाधा रहेगी।
सिंह राशि व लग्न वालों के लिए लग्न से ही
चांडाल योग बनने से बनते काम में रुकावट, भाइयों में टकराव, मानसिक चिंता, संतान से चिंता, स्वास्थ्य में कमी महसूस हो सकती है।
उपाय : पुखराज पहनें व केसर का तिलक लगाएं। विद्या के क्षेत्र में पीली वस्तुओं का वितरण करें।
कन्या राशि व लग्न वालों के लिए चांडाल योग
द्वादश भाव से बन रहा है, ऐसी स्थिति में बाहरी संबंधों में सावधानी रखना होगी। यात्रा योग बने तो टालें, जरूरी होने पर सावधानी रखें। पारिवारिक मामलों में, स्त्री पक्ष के संबंधों में सतर्कता रखें व वाद-विवाद से बचकर चलें।
उपाय : चने की दाल गाय को खिलाएं।
तुला राशि व लग्न वालों के लिए एकादश आय भाव से चांडाल योग का भ्रमण होने से आय के साधनों में कमी महसूस होगी व बड़े भाइयों से मनमुटाव की संभावना रहेगी। अनैतिक कार्यों से धन आएगा। स्थायित्व नहीं रहेगा।
उपाय : बड़े भाइयों का आदर करें व केसर का तिलक लगाएं।
वृश्चिक राशि व लग्न वालों के लिए चांडाल योग
दशम भाव से होने से राजनीति के क्षेत्र में बाधा, व्यापार-व्यवसाय में रुकावटों का सामना, नौकरी मे परेशानी, पिता को कष्ट जैसी समस्या से जुझना पड़ता है।
उपाय : पुखराज धारण करना श्रेष्ठ रहेगा।
धनु राशि व लग्न वालों के लिए नवम भाव से भ्रमण होने के कारण भाग्य में कमी, धर्म-कर्म में आस्था की कमी व पारिवारिक कष्ट सहना पड़ता है। स्थानीय राजनीति में व्यवधान भी रहता है।
उपाय : पुखराज धारण करें। हल्दी में रंगे सवा किलो आलू गाय को खिलाने से लाभ होता है
मकर राशि व लग्न वालों के लिए अष्टम भाव से
चांडाल योग होने से चरित्र को सही रखें व स्वास्थ्य का ध्यान रखें। बाहरी संबंधों में सतर्कता बरतें। पराक्रम में कमी, शत्रु से बाधा रह सकती है।
उपाय : पांच प्रकार का अनाज दान करें व भूरा कंबल किसी बुजुर्ग को दान कर सकते हैं।
कुंभ राशि व लग्न वालों के लिए सप्तम भाव से
चांडाल योग चल रहा है, ऐसी स्थिति में दैनिक व्यवसाय पर कुप्रभाव पड़ता है। स्त्री से मनमुटाव व वाद-विवाद की संभावना बढ़ती है। आय में कमी महसूस करते है। शेयर मार्केट में हानि सहनी पड़ सकती है।
उपाय : जीवनसाथी को पीली वस्तु भेंट करें।
मीन राशि व लग्न वालों के लिए षष्ट भाव से भ्रमण होने से शत्रुपक्ष में बाधा, कोर्ट कचहरी के मामलों में हार का सामना करना पड़ सकता हैं। प्रभाव में कमी, पिता को कष्ट रह सकता है। राजनीति मे व्यवधान भी संभव है।
उपाय : पुखराज की अंगूठी मुहूर्त में बनवाकर धारण करें, व चने की दाल गाय को खिलाएं।
गजकेशरी योग
गजकेशरी योग
चंद्रमा से केंद्र में अर्थात पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव में बृहस्पति स्थित हो, तो गजकेशरी योग होता है। बहुत सी टीकाओं में बृहस्पति की लग्न से केंद्र स्थिति योगकारक मानी है लेकिन मूल योग चंद्रमा से ही समझना चाहिए।
यह एक प्रकार का राज योग है। जातक नेता,
व्यापारी, विधानसभा का सदस्य, संसद, संस्था का मुखिया या राजपत्रित अधिकारी होता है। प्राय: इस योग वाले जातक जीवन में पर्याप्त उन्नति करते हैं और मरने के बाद भी उनकी यशोगाथा रहती है। चंद्रमा से केंद्र में अर्थात पहले,
चौथे, सातवें और दसवें भाव में बृहस्पति स्थित हो,
तो गजकेशरी योग होता है। बहुत सी टीकाओं में बृहस्पति की लग्न से केंद्र स्थिति योगकारक मानी है लेकिन मूल योग चंद्रमा से ही समझना चाहिए। इसी योग में यदि शुक्र या बुध नीच राशि में स्थित न होकर या अस्त न होकर चंद्रमा को संपूर्ण दृष्टि से देखते हों तो प्रबल गज केशरी योग होता है। जब भी बृहस्पति की महादशा आएगी इसका उत्तम फल प्राप्त होगा। चंद्रमा की महादशा में भी अच्छे फल प्राप्त होंगे। राज केशरी योग वाले जातकों को बृहस्पति और चंद्रमा इन दो महादशाओं में से जो पहले आएगी उसमें अच्छा फल प्राप्त करते हुए देखा गया है। डॉ। राजेंद्र प्रसाद का मंगल की महादशा में जन्म हुआ था। चंद्रमा की महादशा उनके जीवन में संभव नहीं थी। बृहस्पति की महादशा में उनको मान-सम्मान व प्रसिद्धि प्राप्त हुई। ऎसे जातक जिनका जन्म केतु,
शुक्र और सूर्य की महादशा में हुआ हो उनके जीवन में चंद्रमा व बृहस्पति दोनों की महादशा भोगने का सुख प्राप्त होता है।
ज्योतिष शास्त्र में कई शुभ और अशुभ योगों का वर्णन किया गया है। शुभ योगों में गजकेशरी योग को अत्यंत शुभ फलदायी योग के रूप में मान्यता प्राप्त है। यह योग गुरू व चन्द्र की केन्द्र में युति होने से अथवा केन्द्र स्थान में स्थित गुरू व चन्द्र के मध्य दृष्टि सम्बन्ध होने पर बनाता है। केन्द्र के अलावे ये दोनों ग्रह त्रिकोण में नवम एवं पंचम होकर भी शुभ फल देते हैं। कुण्डली में इस योग के होने पर जहां कुछ लोग उन्नति करते हैं तो कुछ लोगों की कुण्डली में यह योग प्रभावहीन हो जाते है। इस संदर्भ में ज्योतिषशास्त्र कुछ नियमों की व्याख्या करता है कि कैसे यह योग शुभ फल देता और किन स्थितियों में यह प्रभावहीन होता है।