मंगलवार, 16 अगस्त 2016

जानिए राहु के कारण कब मिलते हैं सुख और कब आती हैं परेशानियां

जानिए राहु के कारण कब मिलते हैं सुख और कब आती हैं परेशानियां

कुंडली में राहु की महादशा 18 वर्ष की होती है। राहु में राहु की अंतर्दशा का काल 2 वर्ष 8 माह और 12 दिन का होता है। इस अवधि में राहु से प्रभावित व्यक्ति को अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ सकता है। विष और जल के कारण पीड़ा हो सकती है। खराब भोजन से स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसके अतिरिक्त अपच, सर्पदंश, अनैतिक संबंध के योग भी इस अवधि में बनते हैं। अशुभ राहु की अवधि में व्यक्ति के किसी करीबी व्यक्ति से दूर हो सकता है। किसी दुष्ट व्यक्ति के कारण परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

राहु में बृहस्पति कीअंतर्दशा

राहु की महादशा में गुरु की अंतर्दशा की अवधि 2 वर्ष 4 माह और 24 दिन की होती है। राक्षस प्रवृत्ति का ग्रह राहु और देवताओं के गुरु बृहस्पति का यह संयोग सुखदायी होता है। व्यक्ति के मन में श्रेष्ठ विचारों का संचार होता है और उसका शरीर स्वस्थ रहता है। धार्मिक कार्यों में उसका मन लगता है। यदि कुंडली में गुरु अशुभ हो और राहु के साथ या राहु की दृष्टि गुरु पर हो तो शुभ फल नहीं मिलते हैं।

राहु में शनि की अंतर्दशा
राहु में शनि की अंतर्दशा 2 वर्ष 10 माह और 6 दिन की होती है। इस अवधि में परिवार में कलह की स्थिति बनती है। तलाक भाई, बहन और संतान से अनबन, नौकरी में या अधीनस्थ नौकर से संकट की संभावना रहती है। शरीर में अचानक चोट या दुर्घटना के दुर्योग, कुसंगति आदि की संभावना भी रहती है। साथ ही वात और पित्त जनित रोग भी हो सकता है।
राहु में बुध की अंतर्दशा
राहु की महादशा में बुध की अंतर्दशा की अवधि 2 वर्ष 3 माह और 6 दिन की होती है। इस समय धन और पुत्र प्राप्ति के योग बनते हैं। राहु और बुध की मित्रता के कारण मित्रों का सहयोग प्राप्त होता है। साथ ही, कार्य कौशल और चतुराई में वृद्धि होती है। व्यापार का विस्तार होता है और मान, सम्मान यश और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

राहु में केतु की अंतर्दशा
राहु की महादशा में केतु की यह अवधि सामान्यत: शुभ फल नहीं देती है। एक वर्ष और 18 दिन की इस अवधि में व्यक्ति को सिर से जुड़ी बीमारियां, शत्रुओं से परेशानी, शस्त्रों से घात, अग्नि से हानि, शारीरिक पीड़ा आदि का सामना करना पड़ सकता है। रिश्तेदारों और मित्रों से परेशानियां व परिवार में क्लेश भी हो सकता है।
राहु में शुक्र की अंतर्दशा
राहु की महादशा में शुक्र की दशा तीन वर्ष तक रहती है। इस अवधि में वैवाहिक जीवन में सुख मिलता है। वाहन और भूमि की प्राप्ति के योग बनते हैं। यदि कुंडली में शुक्र और राहु शुभ न हों तो शीत संबंधित रोग, बदनामी और कार्य स्थल पर विरोध का सामना करना पड़ सकता है।

राहु में सूर्य की अंतर्दशा
राहु की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा की अवधि 10 माह और 24 दिन की होती है, जो अन्य ग्रहों की तुलना में सर्वाधिक कम है। इस अवधि में शत्रुओं से कष्ट, शस्त्र से घात, अग्नि से हानि, आंखों के रोग, राज्य या शासन से भय, परिवार में कलह आदि हो सकते हैं। सामान्यतः यह समय अशुभ प्रभाव देने वाला ही होता है।

राहु में चंद्र की अंतर्दशा
एक वर्ष 6 माह की इस अवधि में व्यक्ति मानसिक कष्ट होता है। इस अवधि में जीवन साथी से अनबन भी हो सकती है। लोगों से वाद-विवाद, आकस्मिक संकट एवं जल जनित पीड़ा की संभावना भी रहती है। इसके अतिरिक्त पशु या कृषि की हानि, धन का नाश, संतान को कष्ट भी हो सकते हैं।

राहु में मंगल की अंतर्दशा
राहु की महादशा में मंगल की अंतर्दशा का समय एक वर्ष 18 दिन का होता है। इस समय में अग्नि से भय, चोरी, अस्त्र-शस्त्र से चोट, शारीरिक पीड़ा, गंभीर रोग आदि हो सकते हैं। इस अवधि में पद एवं स्थान परिवर्तन तथा भाई को या भाई से पीड़ा के योग बनते हैं।


सोमवार, 15 अगस्त 2016

तंत्र क्रिया में काम आती हैं ये चीजें, परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए करें उपाय

तंत्र शास्त्र के अतंर्गत कई क्रियाएं की जाती हैं। इनको करने के लिए जिन वस्तुअों का प्रयोग किया जाता है वे देखने में तो साधारण होती हैं परंतु असर चमत्कारी होता है। इनका उपयोग साधारण व्यक्ति भी कर सकता है। इन वस्तुअों का प्रयोग विधि-विधान से करने पर प्रत्येक प्रकार की परेशानियों से छुटकारा मिलता है अौर संपूर्ण इच्छाएं पूरी होती हैं।
काली हल्दी के उपाय
* काली हल्दी के 9 दाने बनाकर उन्हें धागे में पिरोकर धूप, गूगल और लोबान से उनका शुद्धिकरण करके धारण करें। ऐसा करने से ग्रहों के दुष्प्रभावों, टोने- टोटके व नजर का प्रभाव नहीं होता।
* नए कार्य में जाने से पूर्व काली हल्दी का टीका लगाकर जाए सफलता अवश्य मिलेगी।
* किसी को आकर्षित करने के लिए प्रतिदिन काली हल्दी का टीका लगाएं।
गोमती चक्र के उपाय
* कोर्ट-कचहरी में सफलता पाने के लिए वहां जाते समय घर के बाहर गोमती चक्र रखकर उस पर दाहिना पैर रखकर जाएं।
* शत्रु बढ़ने पर जितने अक्षर का शत्रु का नाम है, उतने गोमती चक्र लेकर उस पर शत्रु का नाम लिखें अौर उन्हें जमीन में दबा दें। ऐसा करने से दुश्मन पराजित हो जाएंगे।
लघु नारियल के उपाय
* शुभ मुहूर्त में 11 लघु नारियल मां लक्ष्मी के चरणों में रखकर 'ऊँ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नीं च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात्' मंत्र का जप करें। इस मंत्र का 2 माला जाप करें। उसके बाद इन लघु नारियलों को लाल कपड़े में लपेट कर तिजोरी में रखें। अगले दिन किसी नदी या तालाब में बहा दें। जिससे लक्ष्मी घर में लक्ष्मी का स्थिर वास होता है।
* 11 लघु नारियल एक पीले कपड़े में बांधकर रसोई घर के पूर्वी कोने में बांधने से धन-धान्य की कमी नहीं होती अौर अन्न के भंडार भरे रहते हैं।
दक्षिणावर्ती शंख के उपाय
* अन्न, धन अौर वस्त्रों के भंडार में दक्षिणावर्ती शंख रखने से इनमें कभी कमी नहीं होती। शयनकक्ष में रखने से शांति का अनुभव होता है।
* दक्षिणावर्ती शंख में शुद्ध जल भरकर, व्यक्ति, वस्तु, स्थान पर छिड़कने से दुर्भाग्य, अभिशाप, तंत्र-मंत्र आदि का प्रभाव समाप्त होता है।
* इसे घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है अौर सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार होता है।
कमल गट्टे के उपाय
* लक्ष्मी माता के चित्रपट पर कमल गट्टे की माला पहनाकर पवित्र नदी में विसर्जित करने से घर में लक्ष्मी का स्थिर वास होता है।
* दरिद्रता से मुक्ति पाने के लिए प्रत्येक बुधवार को 108 कमलगट्टे के बीज लेकर घी के साथ एक-एक करके अग्नि में 108 आहुतियां दें।
एकाक्षी नारियल के उपाय
* जिस घर पर एकाक्षी नारियल की पूजा होती है उनके पारिवारिक सदस्यों पर तांत्रिक क्रियाओं का प्रभाव नहीं होता अौर उन्हें मान-सम्मान, प्रतिष्ठा व यश की प्राप्ति होती है।
* मुकद्दमे में सफलता प्राप्ति के लिए रविवार को एकाक्षी नारियल पर विरोधी का नाम लिखें अौर उस पर लाल कनेर का फूल रख दें। कोर्ट जाते समय फूल साथ लेकर जाने से फैसला पक्ष में होता है।
हकीक के उपाय
* धन संबंधित समस्या से मुक्ति पाने हेतु किसी भी शुक्रवार को रात को हकीक की माला से 108 बार 'ऊं ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नम:' मंत्र का जाप करें।
* किसी मंदिर में 11 हकीक पत्थर अर्पित करके कहें कि अमुक कार्य में सफलता मिले। ऐसा करने से उस कार्य में अवश्य विजय मिलती है।
मोती शंख का उपाय
* बुधवार को सुबह स्नान करके साफ वस्त्र में अपने सम्मुख मोती शंख रखें। उसके बाद उस पर केसर से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं फिर इस मंत्र का जाप करें-
श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:
मंत्र का जाप स्फटिक माला से करें। मंत्रोच्चार के साथ एक-एक चावल इस शंख में डालते जाएं। चावल के दाने टूटे हुए न हो। इस उपाय को लगातार 11 दिनों तक करें। प्रतिदिन एक माला का जप करें उन चावलों को एक सफेद रंग के वस्त्र की थैली में रखकर 11 दिनों के पश्चात चावल के साथ शंख को भी उस थैली में रखकर तिजोरी में रखें।