मेष नक्षत्र. वृषभ नक्षत्र मिथुन नक्षत्र
मेष नक्षत्र
अश्विनी नक्षत्र : ( गंड मूल दोष )
इस नक्षत्र के देव अश्विनी कुमार और स्वामी केतु है | इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक उत्साही और उमंगवान होते हैं | सृजनात्मक कार्य करते हैं | इस राशि और इस नक्षत्र में जन्म लेने वालों का शारीरिक और मानसिक विकास अच्छा होता हैं | इस नक्षत्र का स्वामी केतु होने के कारण इनका काम अचानक बनता है या बिगड़ता है | ये क्रोध ज्यादा करते हैं | ये आर्युवेद में विश्वास करते हैं |
अश्विनी नक्षत्र :
१ चरण : पिता को कष्ट भय.
२ चरण : सुख सम्पति में वृद्धि
३ चरण : राज काज में विजय
४ चरण : राज्य में सम्मान
भरणी नक्षत्र :
इस नक्षत्र के देव यमराज और स्वामी शुक्र है | इस राशि के दुर्गुणों कि वजह से इन्हे क्रोध ज्यादा आता है और शारीरिक सुख मे रुचि रहती है | नक्षत्र का स्वामी शुक्र होने कि वजह से ये विलासी प्रवृत्ति के होते है |संबधों का कारक शुक्र होने की वजह से संबंध बिगड़ते नही है | या तो अधिक दोस्त होते है या कम मित्रोंसे गहरी दोस्ती होती है | त्वचा पर चमक पायी जाती है | यदि कामप्रवृत्ति घटती है तो चेहरे की चमक और बढ़ती है |
कृतिका नक्षत्र :
इस नक्षत्र के देव अग्नि है और स्वामी सूर्य है | सृजनात्मक और संशोधनात्मक प्रवृत्ति पायी जाती है | इनमे प्रशंषा पाने कि इच्छा होती है | ये दुसरों को माफ़ करने पर विश्वास करते हैं | इनका मन योग और ध्यान में लग जाए तो कामवृत्ति घटती है और मोक्ष प्राप्ति हो सकती है | छेड़ने पर अतिशय क्रोध करते है | ये सत्ता हासिल कर पाते है |
वृषभ नक्षत्र
वृषभ नक्षत्र
कृतिका नक्षत्र :
इस नक्षत्र के देव अग्नि है और स्वामी सूर्य है | इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक उत्साही और उमंगसे भरपूर होते है | इनमें स्वार्थवृत्ति नहीं पायी जाती है | ये महत्वकांक्षा बहुत होती है और सत्ता का शौक होता है |
रोहिणी :
इस नक्षत्र के देव ब्रम्हा और स्वामी चंद्र हैं | इन जातकों में ममत्व, लगनशीलता, कल्पनाशीलता और मौलिकता पायी जाती है | इनके साथ साथ स्वार्थवृत्ति भी इनमे ज्यादा होती है | गुस्सा होने पर भी चेहरे पर गुस्सा नही दिखता है |
मृगशीर्ष :
इस नक्षत्र के देव चंद्र और स्वामी मंगल है | कृतिका नक्षत्र जातकों से कम में स्वार्थवृत्ति पायी जाती है| उत्साही होते है | जो काम हाथ में लेते हैं उसे पूरा कर के ही छोड़ते हैं | नेतृत्व करने और छोटे होते हुए भी बड़प्पन दिखाने आदि कार्यो में आनंद आता है | जितना शीघ्र ये उत्साहित होते हैं उतना ही शीघ्र हताश भी हो जाते है |
मिथुन नक्षत्र
मृगशीर्ष :
इस नक्षत्र के देव चंद्र और स्वामी मंगल है | उत्साही और मेहनत करने वाले होते हैं | इन जातकों में कूटनीति के कम गुण पाए जाते हैं | पुरुष जातको में संपूर्ण पुरुषत्व और स्त्रियों में संपूर्ण स्त्रित्व के गुण पाए जाते है |आत्मविश्वास पाया जाता है | अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिये मेहनत करते हैं | स्वभाव सरल होता है और जीवन सफ़ल होता है| शारीरिक सुख पाने की इच्छा ज्यादा रहती है |
आर्द्रा नक्षत्र :
इस नक्षत्र के देव रुद्र (शंकर) और स्वामी मंगल है | मिथुन राशि और इस नक्षत्र में जन्में जातक कुशल राजनीतिक और कूटनीतिक होते है जो दुश्मन को धूल चटा देते है | ये गंदी राजनीति पसंद नही करते है |सीधी और सच्ची राजनीति करते है| झूठ नही बोलते हैं या पकड़ाते नही हैं | अपने कैरियर में आँच नही आने देते है |
पुनर्वसु :
इस नक्षत्र के देव अदिति (देवों कि माता )और स्वामी गुरु है | इन लोगोंमें धार्मिकता ज्यादा होती है इस वजह से राजनीतिक गुण पाए जाते हैं | इनका स्वभाव सरल और उत्साही होते है | दुसरों का अहित करके खुद का हित नही करते हैं | इनमे कामेच्छा सीमित होती है | पत्नी के अलावा किसी से प्यार नही करते हैं | स्वार्थी होने के साथ-साथ प्यार करने वाले भी होते हैं |
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