कर्क नक्षत्र सिंह नक्षत्र. कन्या नक्षत्र
कर्क नक्षत्र
पुनर्वसु :
इस नक्षत्र के देव अदिति (देवों कि माता ) और स्वामी गुरु है | इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातकों का शरीर भरावदार होता है | ये धार्मिक होते है | कोई भी काम केवल शुरु करने में उत्साही होते है | इनकी प्रवृत्ति हमेशा बदलती रहती है |
पुष्य :
इस नक्षत्र के देव गुरु है और स्वामी शनि है | शारीरिक सुख अधिक रस होने की वजह से संतान की संख्या जयादा होती है | पुरुषत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता है |
अश्लेषा : ( गंड मूल दोष )
इस नक्षत्र के देव नाग (सर्प) और स्वामी बुध है | इस नक्षत्र और कर्क राशि के जातक बहुत कोमल मन के होते हैं और इस कारण इनपे छोटी-छोटी बातों का भी गहरा प्रभाव पड़ता है |
अश्लेशा नक्षत्र :
१. चरण : शान्ति करवाए तो शुभ फल प्राप्त होता है
२ चरण : धन नाश
३ चरण : माता को कष्ट
४ चरण : पिता के लिए कष्टप्रद
सिंह नक्षत्र
मघा नक्षत्र : (गंड मूल दोष)
इस नक्षत्र के देव पितृ और स्वामी केतु है इसलिए इन जातको में दूरदृष्टि कम पायी जाती है | ये किसी से भी धोखा खा सकते हैं | भोले स्वभाव के होते हैं | इनके साथ फ़्रेक्चर और दुर्घटना होने की ज्यादा संभावना होती है |
माघ नक्षत्र :
१ चरण: माता के लिए अनिष्ट
२ चरण: पिता को कष्ट.
३ चरण: सुख और समृधि कारक.
४ चरण: धन विद्या और प्रगति
पूर्वा फ़ाल्गुनी नक्षत्र :
इस नक्षत्र के देव सूर्य और स्वामी शुक्र है | इस कारण इनमें नियमितता का गुण पाया जाता है | इनमे संतुष्ट होने कि प्रवृत्ति कम पायी जाती है | इनकी पसंद ऊँची होती है | आत्मविश्वास कम और अहम ज्यादा पाया जाता है | ये आलसी होते है | भौतिक सुख संपत्ति और वैभवशाली जीवन जीना पसंद करते हैं |
उत्तरा फ़ाल्गुनी नक्षत्र :
इस नक्षत्र के देव आर्यमान (सूर्य के भेद ) और स्वामी सूर्य है | सिंह राशि में पाए जाने वाले सारे सद्गुण इन जातको में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं | इस नक्षत्र के जातकों में दूरंदेशी पायी जाती है |
कन्या नक्षत्र
उत्तर फ़ाल्गुनी :
इस नक्षत्र के देव आर्यमान (सूर्य के भेद ) और स्वामी सूर्य है | इनमें उत्साह की मात्रा संतुलित प्रमाण मे होती है | इन जातकों की कामेच्छा मध्यम होती है | कन्या राशि में पाए जाने वाले सारे गुण इन जातकों में पाए जाते हैं |
हस्त :
इस नक्षत्र के देव सूर्य और स्वामी चंद्र हैं | आकर्षण शक्ति और कल्पना शक्ति इन जातकों में बडी मात्रामें होती है | साहित्य,संगीत और कला क्षेत्र में इऩ्हें रुचि रहती हैं | इन जातकों में गुण तो बहुत होते हैं परंतु असफ़ल होने का भय रहता है | ये बडी लगन से अपना काम करते हैं | ये सामनेवालेसे जितना प्रेम करते है उससे उतने ही प्रेम कि आशा रखते है |
चित्रा :
इस नक्षत्र के देव विश्वकर्मा और स्वामी मंगल है | ये बहुत शौकिन मिजाज होते हैं | इनमे शिल्पकला और विविध कलाओं के प्रति रुचि होती है | नाटक और सिनेमा के भी शौकिन होते हैं | इनका मन बच्चो के जैसा होता है और ये बहुत शीघ्र रुठ जाते है | ये मान-सम्मान और प्रतिष्ठा को बहुत महत्व देते हैं |
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