बुधवार, 16 मार्च 2016

बृहस्पति

5. बृहस्पति

मित्र: सूर्य, चंद्रमा, मंगल।
शत्रु: बुध, शुक्र।
सम: शनि।
अधिपति: धनु, मीन।
मूलत्रिकोण: धनु
उच्च: कर्क
नीच: मकर
कला/किरण: 10/12
लिंग: पुलिंग।
दिशा: उत्तर -पूर्व।
शुभ रंग: हल्का नीला, नींबू जैसा पीला।
शुभ रत्न: पीला नीलम, स्वर्णिम पुखराज (4 से 6 कैरेट का, सोने में)।शुभ संख्या: 3, 12, 21.देवता: नारायण, शिव, इन्द्र, ब्रह्मा।

बीज मंत्र :
ऊँ ग्राम् ग्रीम् ग्रौम् से गुरुवे नम:। ( 19000 बार)।

वैदिक मंत्र :
देवानां च ऋशीणां च गुरु कान्चन सन्निभम्।
बुधिभूतं त्रिलोकेश तं गुरुं प्रणामाम्यहम्।।

दान योग्य वस्तुएं :
हल्दी, चना दाल, पुखराज, सोना, माणिक, नमक, गुड़, पीला कपड़ा, पीला फूल या लड्डू (गुरुवार के दिन शाम के समय)।

स्वरूप :
गोरी रंगत, तन्दुरुस्त शरीर, स्थूल, सुस्त।

त्रिदोष व शरीर के अंग :
जांघ, कफ, जीभ, फेफड़ा, कान, घुटना, गुर्दा, यकृत, मोटापा,मस्तिष्क, प्लीहा।

रोग :
पेट की समस्याएं, गैसीय समस्याएं, मानसिक समस्याएं, मधुमेह, बदहजमी, आंत उतरना, बेहोशी, मोतियाबिंद, अंगों का बढ़ना, कान, फेफड़ा या नाभि से संबंधित रोग, पेट फूलना, अधिवृक्क, फोड़ा, बवासीर, मानसिक उलझन, रक्तहीनता, पित्ताशय, पीलिया, जलोदर/ड्राप्सी, ज्वर, नासूर, चक्कर आना, बदन दर्द, सिर चकराना।

प्रतिनिधित्व :
ज्ञान, बुद्धि, खुशहाली, समृद्धि, जीव।

विशिष्ट गुण :
आध्यात्मिक, विस्तार व गरिमा का दार्शनिक ग्रह, आध्यात्मिकता व बुद्धि प्रदान करता है, एक आदर्श ग्रह, द्विपद।

कारक :
गुरु, दादा -दादी, पति, पुत्र, धर्म, धार्मिक क्रियाकलाप, विश्वास, ग्रन्थ, बलिदान, भक्ति, सद्गुण, धन-सम्पदा, बुद्धिमानी, शिक्षा, ज्ञान, शाही सम्मान, तर्क, ज्योतिष, इंद्रियों पर नियंत्रण, सदाचार, जनन, समृद्धि।

व्यवसाय व जीविका :
दार्शनिक, प्राध्यपक, न्यायाधीश, कानून, वकील, अदालत, छात्र, सम्मानित स्थिति, बैंक, आय -कर, भंडारण, राजस्व, संपादक, शिक्षक, लेखा परीक्षक, विज्ञापन, कोषाध्यक्ष, सभासद, पुजारी, संत व ऋषि, धर्मार्थ संस्थाएं, मंदिर, शेयर बाजार, मंत्री।

शनि

7. शनि

मित्र: बुध, शुक्र।
शत्रु: सूर्य, चंद्रमा, मंगल।
सम: बृहस्पति।
अधिपति: मकर,कुम्भ।
मूलत्रिकोण: कुम्भ
उच्च: तुला
नीच: मेष
कला/किरण: 1/16.
लिंग: स्त्रीलिंग,नपुंसक।
दिशा: पश्चिम।
शुभ रंग: ग्रे, गहरा नीला, काला।
शुभ रत्न: नीला नीलम, बिल्लौर/फिरोजा, (स्टील या पंचधातु में 5 से 7 कैरेट का, मध्यमा उंगली में)
शुभ संख्या: 8, 17, 26.
देवता: ब्रह्मा, शिव (महामृत्युन्जय जाप)।

बीज मंत्र :
ऊँ प्राम् प्रीम् प्रौम् से शनाए नम:। (23000 बार)।

वैदिक मंत्र :
नीलांजन समाभासं रवि पुत्र यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

दान योग्य वस्तुएं :
लोहा, काली गाय या घोड़ा, काले कील, काला कपड़ा, काला फूल, मैश दाल, कस्तूरी। (शनिवार के दिन दोपहर के समय)

स्वरूप :
लम्बा व पतला शरीर, पीली व धंसी हुई आँखे, चौड़े व बड़े दांत, बड़े व सख्त नाखून, सुस्त, वातरोगी, सख्त व उलझे हुए बाल।

त्रिदोष व शरीर के अंग :
वात, पित्त, सिर, गर्दन, दांत, हड्डी।

रोग :
मानसिक पतन, वातरोग, कैंसर, ट्यमर, पेट, गैसीय परेशानी, खट्टी डकारें, दांतों की समस्या, लकवा, बहरापन, अंगों की हानि, दर्द, मिर्गी, कटना, ग्रंथियों के रोग, चिरकालिकता, चोट के निशान।

प्रतिनिधित्व :
मोक्ष कारक, दुख, लोकतंत्र, देरी, अवरोध, मुसीबत।

विशिष्ट गुण :
कंजूस ग्रह, तक्र का ग्रह, दर्शन, नपुंसकता, सन्यास, ठंडा - बर्फीला ग्रह, विनाशकारी बल, गोपनीय, बंजर।

कारक :
छोटा सहोदर भाई/बहन, धैर्य, मृत्यु, बुढ़ापा, पाप, आलस्य, यम, मुसीबत, गरीबी, त्याग, नौकरी, नौकर, दासता, गुलामी, कार्यकर्ता, अछूत, इमारती लकड़ी, पैर, विलम्ब, रूकावट, उंचाई से गिरना, दरीद्रता, रोग, राख, जहर, लकड़ी, उन, उदासी, तीर्थायात्रा, जमीन, दीर्घायु, सरकार से शत्रुता, काले अनाज, आवास के लिए विदेश यात्रा, कृषि, भय, तेल, खनिज, दैवीप्रकोप, अस्त्र - शस्त्र, अपमान, विकलांगता, लूटपाट, सन्यास।

व्यवसाय व जीविका :
सभी प्रकार के जिम्मेदारीपूर्ण काम, दंड से जुडे़ हुए कार्य, जुए का अड्डा, ड्राइवर, कूली, निर्माणकर्ता, नौकर, दास वर्ग/शूद्र, कठिन परिश्रम वाले कार्य, सेवा व शारीरिक कार्य, ईंट, शीश व टाईल्स का कारखाना, जूते - चप्पल, तेल निकालना, सरकारी नौकरी, लोहा व इस्पात का काम, बढ़ईगीरि, गहन ध्यान व व्यापक अध्ययन से संबंधित मामले, लकड़ी व पत्थर का काम, इमारत निर्माण, धोखा, भिखारी, जल्लाद, योगी, वेश्यालय, काला जादू व कला, छाता, राजमिस्त्री, कृषि औजार, खान मजदूर, ठेकेदार।

शनि ग्रह के उपाय

बीज मंत्र :
ऊँ प्राम् प्रीम् प्रौम् से शनाए नम:। (23000 बार)।

वैदिक मंत्र :
नीलांजन समाभासं रवि पुत्र यमाग्रजम्।
छाया मार्तण्ड सम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

दान योग्य वस्तुएं :
लोहा, काली गाय या घोड़ा, काले कील, काला कपड़ा, काला फूल, मैश दाल, कस्तूरी। (शनिवार के दिन दोपहर के समय)

चन्द्रमा

चन्द्रमा 
मित्र: सूर्य, बुध।
शत्रु: कोई नहीं।
सम: मंगल, बृहस्पति, शुक्र, शनि।
अधिपति: कर्क।
मूलत्रिकोण: वृष
उच्च: वृष
नीच: वृश्चिक
कला/किरण: 16/8
लिंग: स्त्रीलिंग।
दिशा: उत्तर-पश्चिम।
शुभ रंग: रूपहला/चांदी जैसा रंग, सफेद।
शुभ रत्न: मोती, चंद्र - रत्न।
शुभ संख्या: 2, 11, 20
देवता: दुर्गा, पार्वती।

बीज मंत्र : ऊँ श्राम् श्रीम् शौम् से चंद्राय नम:। (11000 बार)।
वैदिक मंत्र :
दघिशंखतुशाराभं क्षीरोदोर्णवसभवम् नवमि्। भाशिनं भवत्या भामभोर्मुकुटभुशणम्।।
दान योग्य वस्तुएं : दूध, दही, चावल, मोती, मिश्री, चांदी, सफेद फूल, सफेद कपड़ा या चंदन (सोमवार को शाम के समय)।
स्वरूप :
आँखें, अत्यंत कामुक, वातरोगी, सुस्त प्रकृति, सरस, अस्थिर मानसकता, वृत्ताकार।सित्रिदोष व शरीर आकर्षक के अंग- पुरुष की बाईं आँख व महिला की दाईं आँख, गर्भाशय, छाती, गाल, अण्डाशय, रक्त, वात, कफ, मूत्राशय, पिंडली, मांस, पेट इत्यादि।

त्रिदोष व शरीर के अंग :
पुरुष की बाईं आँख व महिला की दाईं आँख, गर्भाशय, छाती, गाल, अण्डाशय, रक्त, वात, कफ, मूत्राशय, पिंडली, मांस, पेट इत्यादि।
रोग :
क्षय रोग (टी. बी.), गले से संबंधित समस्याएं, खून की कमी, मधुमेह, मासिक अनियमितता, बेचैनी, सुस्ती, सूजन, गर्भाशय से संबंधित रोग, कफ, ड्राप्सी, फेफड़े की सूजन, गुर्दा, रक्त अशुद्धता, सिंग वाले जानवरों से भय, पानी से खतरा, उदरशूल, त्वचा रोग, क्षयरोग, वी.डी., खसरा, बदहजमी, नजला - जुकाम, पेचिश, हृदय रोग, फेफड़ा, अस्थमा, बुखार, पीलिया, पथरी, अतिसार/दस्त।

प्रतिनिधित्व :
हृदय, मन, मस्तिष्क, मूल।

विशिष्ट गुण :
यह बच्चे को धारण करने की शक्ति देता है, संदेहशील, पानी व प्राकृतिक शक्तियों से संबंधित गर्भाधान का एक ग्रह, एक रेंगने वाला कीट।
कारक : जलीय स्थान, माता, हृदय, मस्तिष्क, समुद्री भोजन, मोती, रक्त, शरीर में स्थित तरल पदार्थ, पेट्रोलियम उत्पाद, सुगंध, बाइंर् आँख, बागवानी, यात्रा, भावनाएं, नमक, समुद्री दवा, आंत उतरना, व्यक्तित्व, तरल पदार्थ, विदेश यात्रा, शाही पकवान, परिवर्तन।

व्यवसाय व जीविका :
पत्रकारिता, पर्यटन, यात्री, पानी का काम, आबकारी, महिला कल्याण, विज्ञापन, जलपान गृह, नाविक, नमक विक्रेता, यांत्रिक अभियंता (मकैनिकल इंजिनीयर), कृषि, अस्पताल, निर्संग होम, मवेशी, नौ - परिवहन, नौ - सेना, मत्स्य, पेट्रोलियम, मूंगा, दूध, मदिरा, मोती, पौधशाला, रासायनिक पदार्थ, शीशा/चश्मा। मंगल (तामसी, प्रज्वलित, क्षत्रिय)

केतू

9. केतू

मित्र: --शत्रु: --सम: --अधिपति: --मूलत्रिकोण: --उच्च: --नीच: --कला/किरण: --
लिंग: उभयलिंग।
दिशा: उत्तर - पश्चिम।
शुभ रंग: --शुभ रत्न: बिल्ली की आँख, लापुज लाजुली
शुभ संख्या: --
देवता: --

बीज मंत्र :
ऊँ स्राम् स्रीम् स्रौम् से केतुवे नम:। (40 दिन में 17000 बार)।

वैदिक मंत्र :
केतु कृणवन्न केतवे पेशो मर्या अपेशसे।
समुशभि्उर जायथा:।।

दान योग्य वस्तुएं :
सोना, चीनी, तिल, सुरमा, कस्तूरी, काला या सफेद कंबल, सतअनाजा, काले या सफेद कुत्ते को भोजन का भाग (रविवार को सुबह के समय)।

स्वरूप :
लम्बा कद, आसानी से उत्तेजित होने वाले।

त्रिदोष व शरीर के अंग :
पेट/तोंद

रोग :
त्वचा संबंधी रोग, शरीर में सनसनाहट, आत्घाती प्रवृति, लाइलाज बीमारी, पेट दर्द, बदन दर्द, बुखार, मोतियाबिंद, प्लीहा का बढ़ना, पैरों की जलन, फोड़ा, अन्जाने कारणों से होने वाले रोग, खसरा, विस्फोटक/तेज बुखार, कुष्ठ रोग, कटना चोट लगना, अण्डकोष में वृद्धि, कृत्रिम विष, फेफड़े की समस्या।

प्रतिनिधित्व :
अध्यात्मिकता, उस राशि का स्वामी जहां कि वह स्थित है।

विशिष्ट गुण :
विवाह तथा आध्यात्म का ग्रह, मोक्ष कारक, एक रहस्यमय, भ्रामक, गुप्त व पेचीदा ग्रह।

कारक :
नाना, दादी, स्वप्न, मोक्ष, आँखें, दासता, सरकारी जुर्माना, षड़यंत्र, जख्म, आग से दुर्घटना, हत्या, दण्ड, कारावास, जहर, बुरी आत्मा, अपराधी, व्यभिचारी, चिकित्सक, अंतिम मुक्ति, आकसि्मक मौत, छल से वध करना, दुर्भावनापूर्ण, असभ्य व जहरीला भाषण, विदेशी भूमि पर जीवन, कुष्ठ, अपहरण, तुनकमिजाज, गिरफ्तारी, चोट, उन्माद, जादू - टोना, अलगाव, कृमि, कृमि के कारण होने वाले रोग, दर्शन, लम्बा कद, शरीर पर दाग/धब्बे, धुंएदार रंग, निरंतर धुम्रपान करने वाले, ज्योतिष, धर्म, कंजूस, आत्महत्या, दिवालिया, काटना, संभोग/समागम।

व्यवसाय व जीविका :
धर्मोपदेशक, दर्शन, चिकित्सक, दवा का व्यापारी, रहस्मयी विज्ञान, कचड़ा पेटी, षड़यंत्रकारी/आलेखक, कंकाल, हड्डी, मुर्दाघर, पशुवधशाला, गंदे नाले का कार्य, जहरीली दवाएं, कसाई का काम, दुर्गन्धपूर्ण गंदे स्थल, चमड़ा व खाल, हड्डी मिल, लाशें। सत्याचार्य के अनुसार केतु शनि से संबंधित व्यावसायों पर शासन करता है।

मंगल

3.मंगल

मित्र: सूर्य, चंद्र, बृहस्पति।
शत्रु: बुध।
सम: शनि।
अधिपति: मेष, वृश्चिक।
मूलत्रिकोण: मेष
उच्च: मकर
नीच: कर्क
कला/किरण: 6/10
लिंग: पुलिंग।
दिशा: दक्षिण।
शुभ रंग: गहरा लाल।
शुभ रत्न: लाल मूंगा, रक्तमणि।
शुभ संख्या: 9, 8, 27।
देवता: गणपति, शंमुख कार्तिकेय, हनुमान, सुब्रमन्य।

बीज मंत्र :
ऊँ क्रां क्रीं क्रौं से भोमाये नम:। (20 दिन में 10000 बार)।

वैदिक मंत्र :
ऊँ आस्त्येन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मृत्र्य च।
हिरण्येन सविता रथेनादेवी यति भुवना विपश्यत्।।

दान योग्य वस्तुएं :
लाल कपड़ा, फूल, चंदन की लकड़ी, गेहुं, मसूर की दाल, घी, तांबा (मंगलवार के दिन, सूर्यास्त से पूर्व, 48 मिनट के अन्दर)।

स्वरूप :
मध्यम आकार व लम्बाई, चंचल मन, दुर्बल, चिड़चिड़ा, क्रोधी, क्रूर।

त्रिदोष व शरीर के अंग :
पित्त, हाथ, आँखें, बड़ी आंत, रक्त।

रोग :
रक्तचाप, फोड़ा, रक्त से संबंधित पेरशानी, जलना, कटना, चोट, बवासीर, मूत्राशय से संबंधित परेशानी, हड्डी का टूटना, बोझिल/चढ़ी हुई आँखें, पीलिया, गांठ/ट्यूमर, स्राव, खसरा, मिर्गी, घाव।

प्रतिनिधित्व :
धातु, आन्तरिक - बल।

विशिष्ट गुण :
तानाशाही, बंजर, विवाह संबंधी ग्रह, साहसिक कार्य व विस्तार का ग्रह, निरंकुश शासक।

कारक :
सौतेली माता, छोटा भाई, अचल सम्पत्ति, भूमि, आवेग, क्रोध, हिंसा, घृणा, सहनशक्ति, मांसपेशी, बहादुरी, बल, कामुक, प्रतिरक्षा, शत्रु, रक्त, दुर्घटना, आकस्मिक मृत्यु, हत्या, पाप, प्रतिशोधिता, विज्ञान, गणित, शल्य क्रिया, बीमारी, आकांक्षा की आग, तर्क।

व्यवसाय व जीविका :
प्रापर्टी डीलर, दंत चिकित्सक, दवा विक्रेता, शल्य चिकित्सा, अभियंता/इंजीनियरिंग, रसोईया, नाई, खेल, कुश्ती, शिकार, औजार या वाद्ययंत्र से संबंधित, पुलिस, सेना, भूविज्ञान, सर्कस, धातु का व्यापार, चोरी, जेल, हथियार, बेकर/नानबाई, अग्निशामक दल, भूमि, भट्टी, शस्त्रागार, दुग्धशाला से संबंधित कार्य।बुध (राजसी, थलीय, शुद्र)

शुक्र

6. शुक्र

मित्र: बुध, शनि
शत्रु: सूर्य, चंद्रमा।
सम: मंगल, बृहस्पति।
अधिपति: वृष, तुला।
मूलत्रिकोण: तुला
उच्च: मीन
नीच: कन्या
कला/किरण: 12/14
लिंग: स्त्रीलिंग।
दिशा: दक्षिण - पूर्व।
शुभ रंग: गुलाबी, क्रीम रंग।
शुभ रत्न: हीरा, सफेद गोमेद/मूंगा।
शुभ संख्या: 6, 15, 24.
देवता: लक्ष्मी, इंद्राणी, शाची।
बीज मंत्र : ऊँ ध्राम् ध्रीम् ध्रौम् से शुक्राए नम:। ( 6000 बार)
वैदिक मंत्र : हिमकुन्द मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्व भास्त्र प्रवक्तारं भर्गव प्रणामाम्यहम्।।

दान योग्य वस्तुएं : चीनी, घी, दही, कपूर, चावल, चांदी, सफेद फूल, सफेद कपड़ा, सफेद गाय ( शुक्रवार को सूर्योदय के समय)।

स्वरूप : घघराले बाल, सुन्दर शरीर, आकर्षक स्वरूप, आकर्षक आँखें, यौवनपूर्ण रूप, अल्पहारी, काव्यात्मक, वातरोगी, सुस्त।
त्रिदोष व शरीर के अंग : प्रजनन अंग, कफ, वात, आँखें, मूत्र, वीर्य।
रोग : मोतियाबिंद, जलोदर, शरीर में अत्यंत कष्टदायी पीड़ा, चेहरा, आँख व गुप्तांगों के रोग, अत्यधिक यौनेच्छा या स्वप्नदोष, गुप्त रोग, मूत्राशय में पथरी, गुर्दा, दौरा, मूत्राशय संबंधी रोग, सूजन, प्रजनन संबंधी समस्याएं, मधुमेह।
प्रतिनिधित्व : इंद्रिय सुख, कामोत्तेजक संवेग, जीव। विशिष्ट गुण : काव्य - ग्रह, भौतिकवाद का, शारीरिक सुख का ग्रह तथा वैभव का सूचक, जीवन - शक्ति, कांति, वीर्य, व्यायाम व खेल, कला व संस्कृति।

कारक : विवाह, पत्नी, पत्नी के माता - पिता (सास - ससुर), नाना - नानी, यौन - इच्छा, काम, सुन्दर, इत्र, सुगंध, फूल, संगीत, नृत्य, गीत, नाटक, यौवन, कलात्मक योग्यता, विलासितापूर्ण वस्तुए, गहने, अच्छे कपड़े, कोष/निखात निधि, चांदी, रत्न, मोती, वाहन, भावनात्मक सुख, आवेग, खट्टा, काले बाल, जलीय स्थान, जल क्रीड़ा, मदिरा, रसदार वस्तुएं, कामुकता, मांगल्यकारक, कामलिप्सा, हवस, वीर्य, सुविधाएं।

व्यवसाय व जीविका : कवि, चित्रकारी, कलाकार, संगीतकार, नाटककार, सिनेमा से संबंधित कार्य, वस्त्र, वस्त्र निर्माता, जौहरी, बुनकर, इत्र, वाहन व्यापारी, उत्पादन शुल्क, दुग्धशाला, नौ - सेना, बिल्डींग इंजीनियर, ट्रान्सपोर्ट डीलींग, आयकर, सम्पत्ति कर, राजस्व आदि। यदि राहु/केतु के शनि के साथ संबंध है, ब्युटी पार्लर।

सूर्य

1. सूर्य

मित्र: चंद्रमा, मंगल, वृहस्पति।
शत्रु: शुक्र, शनि।
सम: बुध
अधिपति: सिंह ।
मूलत्रिकोण: सिंह
उच्च: मेष
नीच: तुला
कला/किरण: 30/20
लिंग: पुरुष।
दिशा: पूर्व।
शुभ रंग: संतरी, केसरिया, हल्का लाल।
शुभ रत्न: माणिक, रक्तमणि।
शुभ संख्या: 1,10,19
देवता: शिव, रूद्र, नारायण, अग्नि, सच्चिदानन्द।

बीज मंत्र : ऊँ ह्राम् ह्रीम् ह्रौम् से सूर्याय नम:। (30 दिन में 7000 बार)।

वैदिक मंत्र : ऊँ आस्त्येन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मृत्र्य च। हिरण्येन सविता रथेनादेवी यति भुवना विपश्यत्।।
दान योग्य वस्तुएं : गेहुं, तांबा, माणिक, गुड़, लाल कपड़ा, लाल फूल, चंदंन की लकड़ी, खंडसारी, केसर (रविवार को सूर्योदय के समय)।
स्वरूप : शहद के रंग वाली आँखे, कमजोर दृष्टि, छोटे बाल, वर्गाकार, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, सुगठित शरीर। त्रिदोष व शरीर के अंग : पित्त, वायु, हड्डियां, नाभि/मध्य भाग।
रोग : कमजोर दृष्टि, हृदय रोग, विषाक्तता, हड्डी टूटना, मानसिक परेशानी, सिर दर्द, माइग्रेन, बुखार, जलना, कटना, चोट, सूजाक, त्वचा रोग, कोढ़, पीलिया, पित्तिय प्रकृति, पेट से संबंधित परेशानी, गड़बड़ी, भूख की कमी, अतिसार।
प्रतिनिधित्व : प्राण, आत्मा, अहंकार, डाक्टरी, जीवनशक्ति, धातु, क्षमता, ताकत। विशिष्ट गुण : राजनीति, शाही, कुलीन, ग्रह, चौपाया, जीवन स्रोत, एक नैसर्गिक आत्मकारक, बंजर, गर्म और उर्जा।
कारक : शाही, प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि, शक्ति, स्वास्थ्य, पिता, चाचा, राजनीतिज्ञ, वैद्य, चिकित्सक, अधिकार, दवा, रक्त - संचार, आँखें, ऊन, जंगल, लकड़ी, रेगिस्तान, मकान बनाने की लकड़ी/लट्ठा, आत्मा, सरकार, नौकरी (छठा भाव), व्यवसाय (दसवां भाव), पूजास्थल, साहस, सम्मानित पद, दलाली या कमीशन, पैतृक सम्पत्ति।

व्यवसाय व जीविका : वन अधिकारी, सर्जक, आर्थिक व्यवसाय, राजसी सरकारी नियुक्ति, शासक, प्रबन्धक, प्रोत्साहक, जौहरी, स्वामी, डिजाइनर, ऊन - व्यापारी, शासक वर्ग, मजिस्टे्रट, सर्वेक्षक, संकेतक/तार-बाबू, दलाल। चंद्रमा (सात्विक, जलीय, वैश्य)

बुध

4. बुध

मित्र: सूर्य, शुक्र।
शत्रु: चंद्रमा।
सम: मंगल, गुरु, शनि।
अधिपति: मिथुन, कन्या।
मूलत्रिकोण: कन्या
उच्च: कन्या
नीच: मीन
कला/किरण: 8/10
लिंग: पुलिंग नपुंसक।
दिशा: उत्तर।
शुभ रंग: भूरा, हरा, रंगीन।
शुभ रत्न: पन्ना, सुलेमानी (5 कैरेट शुद्ध चांदी में, दाएं हाथ की दूसरी या चौथी उंगली में)।
शुभ संख्या: 5, 14, 23.
देवता: विष्णु, नारायण।

बीज मंत्र :
ऊँ भ्राम् भ्रीम् भौम् से बुधाए नम:। (21 दिन में 19000 बार)।

वैदिक मंत्र :
प्रियंगुकलिकाश्यामं रूपेणाप्रतिमं बुधम्।
सौम्यम् सौम्यगुणोपेतं तं बुधं प्रणामाम्यहम्।।

दान योग्य वस्तुएं :
चीनी, मूंग, तारपीन का तेल, हरा कपड़ा, हरा फूल, हांथी दंत, कपूर (बुधवार के दिन सूर्यास्त से दो घंटे पहले)।

स्वरूप :
विनम्र वक्ता, पित्त ग्रस्त, सुगठित व विशाल शरीर, बुद्धि व हास्य की ओर झुकाव, वातरोगग्रस्त।

त्रिदोष व शरीर के अंग :
त्वचा, जांघ, कफ, वात, पित्त, गुदा, तंत्रिका तंत्र।

रोग :
मानसिक रोग, टायफायड, ज्वर, मस्तिष्क एवं मुखर अंगों के विकार, बवासीर, गर्दन संबंधी रोग, खसरा, यकृत, तंत्रिका अवसाद, सिर चकराना, पेट, आँख, गला व नाक के विकार, सफेद कोढ़, हड्डी टूटना, बदहजमी, हकलाना, अत्यधिक पसीना आना, विषाक्तता, फोड़ा, आंत संबंधी समस्याएं, नपुंसकता।

प्रतिनिधित्व :
भाषण, बुद्धि, तक्र, धातु मूल जीव का मिश्रण।

विशिष्ट गुण :
बन्धु कारक, विद्या कारक, जनन कारक।

कारक :
मित्र, मामा -मामी, मौसा -मौसी, दत्तक पुत्र, भतीजा/भांजा, बड़ा सहोदर भाई/बहन, बुद्धिमता, शिक्षण, शिक्षा, वेद, पुराण, व्यवसाय, व्यापार, गणित, लेखाशास्त्र, वैज्ञानिक अध्ययन, काला - जादू, क्लर्क, मोती, हांस्य, सुगंध, फूल, भाषण, मुद्रक, प्रकाशक, कस्तूरी, भेंगी आँख, वाक्पटुता, निपुणता।

व्यवसाय व जीविका :
मुनीम, चार्टर्ड अकाउंटेंट, व्यवसाय, जौहरी/मणि ढउंपसजवरूजौहरी/मणिझ परीक्षक, विज्ञापक, पुस्तकालय, अखबार, प्रकाशक, लेखन -सामग्री, पुस्तक विक्रेता, प्रतिलिपिकार, लेखक, साहित्यकार, शिक्षाशास्त्री, शिक्षक, ज्योतिषी, लेखा परीक्षक, डाकिया, पत्रकारिता, चिकित्सक, गणितज्ञ, च्-ज् विभाग, सलाहकार, शिल्प, कानून, व्यापार, परिवहन, यात्री, वाहन चालक क्लर्क, मध्यस्थ/पंच। बृहस्पति (सात्विक, प्रज्वलित, शुभ)

राहु

8 . राहु

मित्र: --शत्रु: --सम: --अधिपति: --मूलत्रिकोण: --उच्च: --नीच: --कला/किरण: --
लिंग: पुलिंग।
दिशा: दक्षिण - पश्चिम।
शुभ रंग: ग्रे, गहरा नीला, काला।
शुभ रत्न: गोमेद, सुलेमानी। पुरूष पंचधातु की अंगुठी में, दाएं हाथ की दूसरी/तीसरी उंगली में तथा महिला प्लेटिनम की अंगुठी में, बाएं हाथी की दूसरी/तीसरी उंगली में।
शुभ संख्या: शुभ
संख्यादेवता: महाशक्ति, नागराज।

बीज मंत्र :
ऊँ भ्राम् भ्रीम् भ्रौम् से राहुवे नम:। (40 दिन में 18000 बार)।

वैदिक मंत्र :
अर्थकायं महावीर्य चंद्रादित्य चिमर्दनम्।
सिंहिकाग र्भसंभूतं राहूं प्रणामाम्यहम्।।

दान योग्य वस्तुएं :
मूली, सरसों, तिल, सतअनाजा, केसर, सुरमा, कोयला, कंबल (सोमवार के दिन सुबह या गुरुवार को शाम के समय)।

स्वरूप :
लम्बा कद, काली रंगत, डरावनी छवि/काया/आकृति, वातरोगी, क्रोधी।

त्रिदोष व शरीर के अंग :
पैर व श्वसन।

रोग :
त्वचा रोग, कृत्रिम जहर, प्लीहा व एड्रीनल ग्रंथि के विकार, पैरों के रोग, फोड़ा, अलसर/नासूर, शरीर में जलन, ऐसे रोग जिनका निदान कठिन हो, दुर्बलता, पागलपन, आंतों से संबंधित रोग, कुष्ठ रोग।

प्रतिनिधित्व :
उस राशि का स्वामी जहां की यह स्थित हो, भौतिकवादी, सर्वातिशयी सिद्धान्त का ग्रह, दिखने में बुढ़ा व गंजा।

विशिष्ट गुण :
विदेश यात्रा, वैराग्यकारक, जनन कारक, सनक/विकेन्द्रता।

कारक :
दादा, नानी, बुरी आदतों का देना, विधवा, अनैतिक महिला से संबंध/महिला से अनैतिक संबंध, रोगी औरत के साथ सुख, दुष्ट औरत, विधवापन, झूठ, गरिमा, अन्वेषक, अनुसंधान, खर्च, तुनकमिजाज, आत्महत्या, जुआरी, शराब, नीच जाति, अन्य जाति, मिथ्या तर्क, खिझाउ/दुखदायी भाषण, अंधकार, डूबाना, जहाज के साथ डूबना, कुष्ठ, शत्रु, दुर्घटना, विधर्मी, कष्टदायक शब्द, जहर, सरीसृप, महामारी/संक्रामक रोग, पत्थर, शिकारी, दर्द व सूजन, त्वचा पर दाग, त्वचा रोग, विदेशी भूमि पर जीवन, अभाव व इच्छा, निर्वासन/देश से निष्कासन, झगड़ा, कटु भाषण, पहलवान, विषैला, धूर्त, निंदक, गुप्तचर, पाखंडी, तुच्छ विचारों वाला, दक्षिण - पश्चिम, दासता, व्यभिचारी, नितम्ब, यात्रा, अंग - विच्छेद, शक्ति|

व्यवसाय व जीविका :
कम्प्यूटर्स, वकील, दवा, अनुसंधान, विमान विद्या/एरोनॉटिक्स, अस्थिर व क्रूर प्रकृति के व्यवसाय, जुआ, सट्टा, चोरी, सांप पकड़ने वाले, मुर्दाघर, गंदे नाले, बिजली, विमानन, एयर लाइन्स/वायुमार्ग, टेलिफोन, छा़त्रवृत्तिधारी, पशुवधशाला, जहरीली दवा, कसाई का काम, दुर्गन्धपूर्ण गंदे स्थान, बेस - जाब, मुर्दे, जादू - टोना, चमड़ा व खाल, हड्डी मिल, पहलवान। सत्याचार्य के अनुसार शनि से संबंधित व्यवसायों पर राहु शासन करता है।केतु ( ड्रैगन की पूंछ, पाश्र्वभाग/पूछांग, अवरोही नोड)