वैवाहिक जीवन में मंगल की इस स्थिति का परिणाम
ज्योतिषशास्त्र में मंगल को क्रूर और पाप ग्रह बताया गया है। कुंडली में मंगल की विशेष स्थिति से ही मांगलिक दोष बनता है तो वैवाहिक जीवन से जुड़ी कई परेशानियों का कारण होता है। इसलिए ज्योतिषी विवाह के लिए कुण्डली मिलाते समय मंगल की स्थिति को जरूर देखते हैं। ज्योतिषशास्त्र में यह भी बताया गया है कि मंगल की विशेष स्थिति से विवाह के बाद स्त्री पुरुष को यौन सुख में भी कमी का सामना करना पड़ता है। तो आइये देखें कुण्डली में मंगल की कैसी स्थिति होने पर यौन सुख में कमी आती है।
इस तस्वीर में देखिए मंगल कुण्डली के पहले घर में बैठा है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मंगल पहले घर में होने पर व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में चोट एवं दुर्घटना की आशंका अधिक रहती है। यह मंगल पारिवारिक जीवन के साथ ही साथ जीवनसाथी एवं यौन सुख में कमी लाता है। मंगल की दृष्टि पहले घर से आठवें घर पर होने के कारण जीवनसाथी की आयु भी प्रभावित होती है।
जिनकी कुण्डली में मंगल चौथे घर में बैठा होता है उनके जीवन में सुख की कमी करता है। सातवें घर में मंगल की दृष्टि से इनकी शादी में देरी होती है। जीवनसाथी से मतभेद एवं यौन सुख में कमी लाता है। ऐसे व्यक्ति यौन रोग से पीड़ित भी हो सकते हैं। इन्हें नौकरी एवं व्यवसाय में नुकसान उठाना पड़ता है। आय एवं लाभ में बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
जिनकी जन्मपत्री में मंगल सातवें यानी जीवनसाथी के घर में होता है उनका अपने जीवनसाथी से अक्सर मतभेद बना रहता है और जिससे दांपत्य जीवन के सुख में कमी आती है। मंगल की दृष्टि यहां से पहले घर पर होने के कारण व्यक्ति क्रोधी होता है और स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव के कारण परेशान होता है। सगे-संबंधियों से सहयोग में कमी एवं आर्थिक नुकसान भी इन्हें उठाना पड़ता है।
तस्वीर में देखिए यहां मंगल आठवें घर में बैठा है। जिनकी कुण्डली में मंगल इस घर में बैठा होता है उन्हें जोखिम से बचना चहिए क्योंकि दुर्घटना की संभावना अधिक रहती है। जीवनसाथी के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बने रहने के कारण इनके दांपत्य जीवन में परेशानी आती है। जीवनसाथी के साथ तालमेल में भी इन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सगे-संबंधियों से मनमुटाव एवं आर्थिक नुकसान भी इन्हें उठाना पड़ता है।
मंगल अगर कुण्डली में 12 वें घर में बैठा होता है तो शादी देर से होती है। व्यक्ति अपने परिवार और जीवनसाथी से अधिकतर दूर ही रहता है। यह अपने वैवाहिक जीवन में यौन सुख की कमी महसूस करते हैं। इन्हें दुर्घटना एवं धोखा मिलने की भी आशांका बनी रहती है। किसी न किसी कारण से यह पूरी नींद नहीं ले पाते हैं।
वैवाहिक जीवन में मंगल की इस स्थिति का परिणाम उन हालातों में अधिक देखने को मिलता है जब वर और कन्या दोनों में से केवल एक ही मांगलिक दोष से प्रभावित होते हैं। जहां पर वर या कन्या की कुण्डली में मंगल बैठा हो उसी घर में अगर कोई दूसरा पाप ग्रह जैसे शनि, राहु या केतु बैठा हो तब इस दोष का प्रभाव कम हो जाता है। कुण्डली में ग्रहों की कुछ अन्य स्थितियां भी मंगल के इस अशुभ प्रभाव को कम करती हैं।
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