1. सूर्य
मित्र: चंद्रमा, मंगल, वृहस्पति।
शत्रु: शुक्र, शनि।
सम: बुध
अधिपति: सिंह ।
मूलत्रिकोण: सिंह
उच्च: मेष
नीच: तुला
कला/किरण: 30/20
लिंग: पुरुष।
दिशा: पूर्व।
शुभ रंग: संतरी, केसरिया, हल्का लाल।
शुभ रत्न: माणिक, रक्तमणि।
शुभ संख्या: 1,10,19
देवता: शिव, रूद्र, नारायण, अग्नि, सच्चिदानन्द।
बीज मंत्र : ऊँ ह्राम् ह्रीम् ह्रौम् से सूर्याय नम:। (30 दिन में 7000 बार)।
वैदिक मंत्र : ऊँ आस्त्येन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मृत्र्य च। हिरण्येन सविता रथेनादेवी यति भुवना विपश्यत्।।
दान योग्य वस्तुएं : गेहुं, तांबा, माणिक, गुड़, लाल कपड़ा, लाल फूल, चंदंन की लकड़ी, खंडसारी, केसर (रविवार को सूर्योदय के समय)।
स्वरूप : शहद के रंग वाली आँखे, कमजोर दृष्टि, छोटे बाल, वर्गाकार, अत्यधिक चिड़चिड़ापन, सुगठित शरीर। त्रिदोष व शरीर के अंग : पित्त, वायु, हड्डियां, नाभि/मध्य भाग।
रोग : कमजोर दृष्टि, हृदय रोग, विषाक्तता, हड्डी टूटना, मानसिक परेशानी, सिर दर्द, माइग्रेन, बुखार, जलना, कटना, चोट, सूजाक, त्वचा रोग, कोढ़, पीलिया, पित्तिय प्रकृति, पेट से संबंधित परेशानी, गड़बड़ी, भूख की कमी, अतिसार।
प्रतिनिधित्व : प्राण, आत्मा, अहंकार, डाक्टरी, जीवनशक्ति, धातु, क्षमता, ताकत। विशिष्ट गुण : राजनीति, शाही, कुलीन, ग्रह, चौपाया, जीवन स्रोत, एक नैसर्गिक आत्मकारक, बंजर, गर्म और उर्जा।
कारक : शाही, प्रतिष्ठा, प्रसिद्धि, शक्ति, स्वास्थ्य, पिता, चाचा, राजनीतिज्ञ, वैद्य, चिकित्सक, अधिकार, दवा, रक्त - संचार, आँखें, ऊन, जंगल, लकड़ी, रेगिस्तान, मकान बनाने की लकड़ी/लट्ठा, आत्मा, सरकार, नौकरी (छठा भाव), व्यवसाय (दसवां भाव), पूजास्थल, साहस, सम्मानित पद, दलाली या कमीशन, पैतृक सम्पत्ति।
व्यवसाय व जीविका : वन अधिकारी, सर्जक, आर्थिक व्यवसाय, राजसी सरकारी नियुक्ति, शासक, प्रबन्धक, प्रोत्साहक, जौहरी, स्वामी, डिजाइनर, ऊन - व्यापारी, शासक वर्ग, मजिस्टे्रट, सर्वेक्षक, संकेतक/तार-बाबू, दलाल। चंद्रमा (सात्विक, जलीय, वैश्य)
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