6. शुक्र
मित्र: बुध, शनि
शत्रु: सूर्य, चंद्रमा।
सम: मंगल, बृहस्पति।
अधिपति: वृष, तुला।
मूलत्रिकोण: तुला
उच्च: मीन
नीच: कन्या
कला/किरण: 12/14
लिंग: स्त्रीलिंग।
दिशा: दक्षिण - पूर्व।
शुभ रंग: गुलाबी, क्रीम रंग।
शुभ रत्न: हीरा, सफेद गोमेद/मूंगा।
शुभ संख्या: 6, 15, 24.
देवता: लक्ष्मी, इंद्राणी, शाची।
बीज मंत्र : ऊँ ध्राम् ध्रीम् ध्रौम् से शुक्राए नम:। ( 6000 बार)
वैदिक मंत्र : हिमकुन्द मृणालाभं दैत्यानां परमं गुरुम्। सर्व भास्त्र प्रवक्तारं भर्गव प्रणामाम्यहम्।।
दान योग्य वस्तुएं : चीनी, घी, दही, कपूर, चावल, चांदी, सफेद फूल, सफेद कपड़ा, सफेद गाय ( शुक्रवार को सूर्योदय के समय)।
स्वरूप : घघराले बाल, सुन्दर शरीर, आकर्षक स्वरूप, आकर्षक आँखें, यौवनपूर्ण रूप, अल्पहारी, काव्यात्मक, वातरोगी, सुस्त।
त्रिदोष व शरीर के अंग : प्रजनन अंग, कफ, वात, आँखें, मूत्र, वीर्य।
रोग : मोतियाबिंद, जलोदर, शरीर में अत्यंत कष्टदायी पीड़ा, चेहरा, आँख व गुप्तांगों के रोग, अत्यधिक यौनेच्छा या स्वप्नदोष, गुप्त रोग, मूत्राशय में पथरी, गुर्दा, दौरा, मूत्राशय संबंधी रोग, सूजन, प्रजनन संबंधी समस्याएं, मधुमेह।
प्रतिनिधित्व : इंद्रिय सुख, कामोत्तेजक संवेग, जीव। विशिष्ट गुण : काव्य - ग्रह, भौतिकवाद का, शारीरिक सुख का ग्रह तथा वैभव का सूचक, जीवन - शक्ति, कांति, वीर्य, व्यायाम व खेल, कला व संस्कृति।
कारक : विवाह, पत्नी, पत्नी के माता - पिता (सास - ससुर), नाना - नानी, यौन - इच्छा, काम, सुन्दर, इत्र, सुगंध, फूल, संगीत, नृत्य, गीत, नाटक, यौवन, कलात्मक योग्यता, विलासितापूर्ण वस्तुए, गहने, अच्छे कपड़े, कोष/निखात निधि, चांदी, रत्न, मोती, वाहन, भावनात्मक सुख, आवेग, खट्टा, काले बाल, जलीय स्थान, जल क्रीड़ा, मदिरा, रसदार वस्तुएं, कामुकता, मांगल्यकारक, कामलिप्सा, हवस, वीर्य, सुविधाएं।
व्यवसाय व जीविका : कवि, चित्रकारी, कलाकार, संगीतकार, नाटककार, सिनेमा से संबंधित कार्य, वस्त्र, वस्त्र निर्माता, जौहरी, बुनकर, इत्र, वाहन व्यापारी, उत्पादन शुल्क, दुग्धशाला, नौ - सेना, बिल्डींग इंजीनियर, ट्रान्सपोर्ट डीलींग, आयकर, सम्पत्ति कर, राजस्व आदि। यदि राहु/केतु के शनि के साथ संबंध है, ब्युटी पार्लर।
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